बिहार

खनन प्रभावित क्षेत्रों पर खर्च होगी DMF राशि

Kavita2
23 Sept 2026 2:28 PM IST
खनन प्रभावित क्षेत्रों पर खर्च होगी DMF राशि
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पटना। खनन गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता देने के लिए जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) की व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब डीएमएफ की राशि का बड़ा हिस्सा उसी क्षेत्र के विकास कार्यों पर खर्च किया जाएगा, जहां से खनिजों का खनन किया जा रहा है। इसके साथ ही डीएमएफ के संचालन और योजनाओं की निगरानी में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी भी बढ़ाई जाएगी।

नई व्यवस्था के तहत संबंधित जिले के सांसदों, विधान पार्षदों और विधायकों को जिला खनिज फाउंडेशन की सदस्यता दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों की भागीदारी के माध्यम से डीएमएफ की योजनाओं की निगरानी को मजबूत करना और फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता बढ़ाना है।

इस बदलाव से खनन प्रभावित गांवों और आसपास के इलाकों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है।

खनन वाले क्षेत्र पर खर्च होगी ज्यादा राशि

जिला खनिज फाउंडेशन का गठन खनन से प्रभावित लोगों और क्षेत्रों के हित में विकास कार्य करने के उद्देश्य से किया गया है। खनन गतिविधियों के कारण संबंधित क्षेत्रों में पर्यावरण, सड़क, पेयजल और स्वास्थ्य जैसी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

नई व्यवस्था में इस बात पर जोर दिया गया है कि जिस क्षेत्र से खनिज संसाधनों का दोहन हो रहा है, वहां डीएमएफ की राशि का बड़ा हिस्सा खर्च किया जाए।

इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश होगी कि खनन से सबसे ज्यादा प्रभावित आबादी को विकास योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ मिले।

जनप्रतिनिधियों की बढ़ेगी भूमिका

डीएमएफ की व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव जनप्रतिनिधियों की भागीदारी को लेकर किया गया है। अब संबंधित जिले के सांसद, विधायक और विधान पार्षद जिला खनिज फाउंडेशन के सदस्य होंगे।

जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं और जरूरतों को फाउंडेशन के सामने रख सकेंगे। इससे योजनाओं के चयन और प्राथमिकता तय करने में जमीनी स्तर की आवश्यकताओं को शामिल करने में मदद मिल सकती है।

जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से डीएमएफ की बैठकों में खनन प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं पर अधिक विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है।

योजनाओं की निगरानी होगी मजबूत

सरकार का उद्देश्य डीएमएफ के माध्यम से चलने वाली योजनाओं की निगरानी को मजबूत करना भी है। फाउंडेशन के पास उपलब्ध राशि का उपयोग किन परियोजनाओं में किया जा रहा है और उनका लाभ वास्तविक रूप से प्रभावित लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं, इस पर निगरानी बढ़ाई जाएगी।

जनप्रतिनिधियों के सदस्य बनने से विकास कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए जा सकेंगे।

इससे परियोजनाओं में देरी, अधूरे काम या राशि के अनुचित इस्तेमाल जैसी शिकायतों पर बेहतर तरीके से नजर रखने की व्यवस्था बन सकती है।

राशि के इस्तेमाल में पारदर्शिता पर जोर

डीएमएफ के पास खनन गतिविधियों से प्राप्त होने वाली राशि कई जिलों में विकास कार्यों के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय स्रोत है। इसलिए इसके उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

नई व्यवस्था के तहत योजनाओं के चयन से लेकर उनके क्रियान्वयन तक निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डीएमएफ की राशि उन कार्यों पर खर्च हो, जिनकी खनन प्रभावित क्षेत्रों में वास्तव में जरूरत है।

सड़क और पेयजल जैसी सुविधाओं पर हो सकता है फोकस

खनन प्रभावित क्षेत्रों में भारी वाहनों की आवाजाही और लगातार खनन गतिविधियों के कारण सड़कों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। कई इलाकों में धूल, प्रदूषण और पेयजल की समस्या भी देखने को मिलती है।

ऐसे में डीएमएफ की राशि से सड़क निर्माण एवं मरम्मत, पेयजल व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े काम किए जा सकते हैं।

योजनाओं का चयन संबंधित क्षेत्र की जरूरत और निर्धारित नियमों के आधार पर किया जाएगा।

स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की जरूरत

खनन वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर धूल और प्रदूषण का प्रभाव एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहता है। ऐसे क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की सुविधाओं को बेहतर बनाने, जांच और उपचार की व्यवस्था मजबूत करने तथा स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता कार्यक्रमों पर डीएमएफ की राशि खर्च की जा सकती है।

इसके अलावा दूरदराज के खनन प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना भी विकास योजनाओं का हिस्सा हो सकता है।

शिक्षा से जुड़ी योजनाओं को भी मिलेगा फायदा

खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्थित स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए भी डीएमएफ की राशि का उपयोग किया जा सकता है। विद्यालय भवन, अतिरिक्त कक्ष, पेयजल, शौचालय और अन्य जरूरी सुविधाओं को विकसित करने में यह फंड उपयोगी साबित हो सकता है।

स्थानीय जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्रों की जरूरतों के आधार पर ऐसी परियोजनाओं को फाउंडेशन के सामने रख सकेंगे।

इससे उन क्षेत्रों में शिक्षा संबंधी बुनियादी ढांचे को बेहतर करने में मदद मिल सकती है, जहां खनन गतिविधियां बड़े पैमाने पर होती हैं।

स्थानीय जरूरतों के आधार पर बनेंगी योजनाएं

नई व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य स्थानीय जरूरतों को विकास योजनाओं में अधिक महत्व देना है। खनन प्रभावित प्रत्येक क्षेत्र की समस्याएं अलग-अलग हो सकती हैं।

किसी इलाके में सड़क सबसे बड़ी समस्या हो सकती है तो किसी जगह पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा या पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता अधिक हो सकती है।

जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से ऐसी स्थानीय समस्याओं को फाउंडेशन की बैठकों में सामने लाने और उनके समाधान के लिए योजनाएं तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

खनन का लाभ प्रभावित लोगों तक पहुंचाने की कोशिश

खनिज संसाधनों से सरकार और अर्थव्यवस्था को राजस्व मिलता है, लेकिन खनन का प्रत्यक्ष प्रभाव आसपास रहने वाली आबादी पर पड़ता है। जमीन, पर्यावरण, सड़क और स्थानीय संसाधनों पर खनन गतिविधियों का असर हो सकता है।

इसी कारण डीएमएफ व्यवस्था का उद्देश्य खनन से प्राप्त संसाधनों का एक हिस्सा प्रभावित क्षेत्रों के कल्याण पर खर्च करना है।

अब राशि का बड़ा हिस्सा उसी क्षेत्र में खर्च करने पर जोर दिए जाने से स्थानीय लोगों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी।

जवाबदेही बढ़ाने पर जोर

सांसदों, विधायकों और विधान पार्षदों को फाउंडेशन में शामिल करने से डीएमएफ के कामकाज में जवाबदेही का दायरा बढ़ेगा। स्थानीय स्तर पर विकास परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखने में जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

हालांकि व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि योजनाओं का चयन कितनी पारदर्शिता से होता है और निर्धारित राशि समय पर विकास कार्यों में खर्च होती है या नहीं।

कुल मिलाकर नई व्यवस्था में खनन प्रभावित क्षेत्रों को डीएमएफ राशि के इस्तेमाल में प्राथमिकता देने और फाउंडेशन में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य खनन से प्रभावित आबादी तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना, योजनाओं की निगरानी मजबूत करना और फंड के इस्तेमाल को अधिक पारदर्शी बनाना है।

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